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डॉ. सुभाष चंद्रा का भावुक संदेश, बोले- ‘बाबूजी शरीर से दूर हैं, लेकिन संस्कारों में हमेशा जीवित रहेंगे’
पिता नंद किशोर गोयनका की रस्म पगड़ी के बाद पूर्व राज्यसभा सांसद ने साझा की भावनात्मक पोस्ट, जीवन मूल्यों और विरासत को किया याद
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 59 minutes ago
एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने पिता एवं वरिष्ठ उद्योगपति और समाजसेवी स्वर्गीय नंद किशोर गोयनका की रस्म पगड़ी के बाद एक भावुक संदेश साझा किया है. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की जीवन यात्रा भले ही समाप्त हो जाए, लेकिन उसके संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्य हमेशा परिवार और समाज का मार्गदर्शन करते रहते हैं.
डॉ. सुभाष चंद्रा ने 26 जुलाई 2026 को संपन्न हुई रस्म पगड़ी के बाद सोशल मीडिया पर अपने पिता को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि यह केवल एक सामाजिक परंपरा नहीं थी, बल्कि उस जिम्मेदारी को स्वीकार करने का अवसर था, जो एक पिता अपने जाने के बाद परिवार को सौंप जाता है.
‘बाबूजी के संस्कार हमारे आचरण में हमेशा रहेंगे’
अपने संदेश में डॉ. चंद्रा ने कहा कि उनके पिता का जीवन अब केवल यादों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके संस्कार परिवार के व्यवहार, फैसलों और आने वाली पीढ़ियों के माध्यम से आगे बढ़ते रहेंगे. उन्होंने लिखा, "जीवन का एक शाश्वत सत्य है कि एक दिन व्यक्ति दृश्य संसार से विदा हो जाता है, लेकिन उसके संस्कार, उसका अनुशासन और उसके द्वारा दिखाया गया मार्ग समय से परे हो जाता है." डॉ. चंद्रा ने कहा कि उनके पिता के आदर्श और जीवन मूल्य परिवार के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे.
कठिन समय में साथ देने वालों का जताया आभार
डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने संदेश में उन सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस कठिन समय में परिवार का साथ दिया. उन्होंने कहा कि लोगों की उपस्थिति, प्रार्थनाओं और स्नेह ने परिवार को मजबूती दी है, जिसके लिए वे हृदय से आभारी हैं. उन्होंने अपने संदेश के अंत में लिखा, "बाबूजी, आपकी देह यात्रा पूर्ण हो गई है, लेकिन आपके दिए संस्कारों की यात्रा निरंतर चलती रहेगी. ॐ शांति."
96 वर्ष की आयु में हुआ था नंद किशोर गोयनका का निधन
गौरतलब है कि डॉ. सुभाष चंद्रा के पिता नंद किशोर गोयनका का 13 जुलाई 2026 को मुंबई में 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया था. उनका अंतिम संस्कार हरियाणा के अग्रोहा धाम स्थित गोयनका उद्यान में किया गया था.
नंद किशोर गोयनका उद्योग जगत के साथ-साथ समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे थे. उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए डॉ. सुभाष चंद्रा ने हरियाणा के अग्रोहा में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से ‘नंद किशोर गोयनका यूनिवर्सिटी’ स्थापित करने की घोषणा की है. प्रस्तावित विश्वविद्यालय का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ समाज सेवा और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना होगा.
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