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भारत के कंज्यूमर सेक्टर में डील गतिविधियां धीमी, लेकिन निवेश मूल्य में बनी मजबूती: रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक बाजारों में गतिविधियां भी सीमित रहीं. तिमाही के दौरान केवल एक IPO के जरिए 47 मिलियन डॉलर और एक QIP के जरिए 16 मिलियन डॉलर जुटाए गए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 19 hours ago
भारत के कंज्यूमर सेक्टर में अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान डील गतिविधियों में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन निवेश का कुल मूल्य अब भी मजबूत बना हुआ है. ग्रांट थॉर्नटन भारत की ताजा Consumer Dealtracker रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान सेक्टर में 981 मिलियन डॉलर मूल्य की 97 डील हुईं. पिछली तिमाही की तुलना में डील की संख्या में 34 फीसदी और कुल डील वैल्यू में 33 फीसदी की कमी आई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरावट निवेशकों के अधिक सतर्क और चयनात्मक रुख को दर्शाती है. हालांकि, रणनीतिक अधिग्रहण और ग्रोथ स्टेज कंपनियों में निवेश जैसे सौदे उन क्षेत्रों में जारी रहे, जहां निवेशकों को मजबूत संभावनाएं नजर आ रही हैं.
कंज्यूमर सेक्टर में बदला निवेश का रुख
आईपीओ और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) को छोड़ दें तो इस सेक्टर में 95 मर्जर एंड एक्विजिशन (M&A) और प्राइवेट इक्विटी/वेंचर कैपिटल (PE/VC) सौदे हुए, जिनकी कुल वैल्यू 918 मिलियन डॉलर रही. यह आंकड़ा 2025 की दूसरी तिमाही के मुकाबले अभी भी बेहतर रहा.
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और कंज्यूमर इंडस्ट्री लीडर नवीन मलपानी ने कहा कि भारत के कंज्यूमर सेक्टर में संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है. अब निवेश पारंपरिक उपभोक्ता श्रेणियों के बजाय विशेष और तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों की ओर जा रहा है.
उन्होंने कहा कि वेलनेस, प्रीमियम पर्सनल केयर, न्यूट्रिशन और डिजिटल-फर्स्ट कंज्यूमर ब्रांड्स में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि बदलती उपभोक्ता पसंद नए अवसर पैदा कर रही है.
FMCG, टेक्सटाइल और ई-कॉमर्स में सबसे ज्यादा डील
रिपोर्ट के अनुसार, फास्ट मूविंग कंज्यूमर फूड्स (FMCG), टेक्सटाइल एवं अपैरल और ई-कॉमर्स सेक्टर ने मिलकर PE/VC डील की कुल संख्या में 44 फीसदी योगदान दिया.
इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में 172 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ, जिसने तिमाही के दौरान डील गतिविधियों में अहम योगदान दिया.
निवेशकों का फोकस चुनिंदा मजबूत अवसरों पर रहा. शीर्ष पांच M&A डील्स ने कुल M&A वैल्यू में 64 फीसदी योगदान दिया, जबकि टॉप पांच PE/VC निवेशों की हिस्सेदारी कुल PE/VC वैल्यू में 54 फीसदी रही.
M&A गतिविधियों में आई गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में M&A गतिविधियों में कमी आई. इस दौरान 184 मिलियन डॉलर मूल्य की 20 डील हुईं. पिछली तिमाही की तुलना में डील संख्या और वैल्यू दोनों में करीब आधी गिरावट दर्ज की गई.
इसकी मुख्य वजह बड़ी रणनीतिक अधिग्रहण डील्स की अनुपस्थिति रही. घरेलू सौदों का दबदबा कायम रहा. कुल M&A डील्स में घरेलू लेनदेन की हिस्सेदारी 65 फीसदी रही, जबकि कुल डील वैल्यू में इनका योगदान 58 फीसदी रहा.
वहीं, विदेशी कंपनियों की ओर से भारत में किए जाने वाले इनबाउंड M&A सौदों में तेजी आई. इनकी संख्या दोगुनी हुई, जबकि डील वैल्यू में करीब पांच गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई.
Emami ने IncNut Digital में खरीदी 60% हिस्सेदारी
रिपोर्ट के अनुसार, रणनीतिक अधिग्रहणों का फोकस बाजार हिस्सेदारी मजबूत करने, प्रोडक्ट पोर्टफोलियो बढ़ाने और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को बेहतर बनाने पर रहा. तिमाही की सबसे बड़ी M&A डील Emami द्वारा की गई, जिसमें कंपनी ने IncNut Digital (Vedix और Skinkraft ब्रांड्स) में 60 फीसदी हिस्सेदारी 34 मिलियन डॉलर में खरीदी.
PE/VC निवेश रहा डील गतिविधियों का मुख्य आधार
कंज्यूमर सेक्टर में PE/VC निवेश गतिविधियां सबसे बड़ा आधार बनी रहीं. तिमाही के दौरान 734 मिलियन डॉलर मूल्य की 75 PE/VC डील हुईं, जिनका योगदान कुल डील संख्या और वैल्यू दोनों में करीब 80 फीसदी रहा. हालांकि पिछली तिमाही की तुलना में फंडिंग गतिविधियों में कमी आई, लेकिन निवेश मूल्य 2025 की दूसरी तिमाही के स्तर से ऊपर बना रहा.
इस तिमाही की सबसे बड़ी PE डील Advent International का Iscon Balaji Foods में 150 मिलियन डॉलर का निवेश रहा.
IPO और QIP गतिविधियां रहीं कमजोर
रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक बाजारों में गतिविधियां भी सीमित रहीं. तिमाही के दौरान केवल एक IPO के जरिए 47 मिलियन डॉलर और एक QIP के जरिए 16 मिलियन डॉलर जुटाए गए. कुल मिलाकर, रिपोर्ट बताती है कि भारतीय कंज्यूमर सेक्टर में निवेश की रफ्तार भले ही धीमी हुई है, लेकिन निवेशकों का भरोसा अब भी मजबूत है. खासतौर पर प्रीमियम, डिजिटल और विशेष उपभोक्ता श्रेणियों में पूंजी का प्रवाह जारी रहने की उम्मीद है.
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