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साइरस मिस्त्री के बेटों ने ली SP ग्रुप में एंट्री, 18 महीने करना पड़ेगा इसके लिए इंतजार
एसपी समूह के अध्यक्ष और साइरस के बड़े भाई शापूर ने अपने भतीजों को व्यक्तिगत रूप से सलाह देने के लिए अपने विंग में ले लिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः दिवंगत साइरस मिस्त्री के बेटे 26 वर्षीय फिरोज मिस्त्री और 24 वर्षीय जहान मिस्त्री औपचारिक रूप से शापूरजी पालनजी (एसपी) समूह में शामिल हो गए हैं और समूह के शीर्ष पेशेवरों द्वारा निर्देशित किया जाएगा. एसपी समूह के अध्यक्ष और साइरस के बड़े भाई शापूर ने अपने भतीजों को व्यक्तिगत रूप से सलाह देने के लिए अपने विंग में ले लिया है. टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की 4 सितंबर को एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. फिरोज और जहान कार्यकारी भूमिकाओं को लेने से पहले समूह के विभिन्न व्यवसायों और कार्यक्षेत्रों में लगभग 18 महीने काम करेंगे. दोनों हाल ही में भारत लौटे हैं - फिरोज ने येल और जहान ने यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक से पढ़ाई की.
कंपनी में एक महीने पहले किया था ज्वाइन
एसपी ग्रुप के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "ये अभी शुरुआती दिन हैं. उन्हें ज्वाइन किए अभी एक महीना ही हुआ है. एसपी ग्रुप का हर वरिष्ठ अधिकारी उनके पिता की विरासत को आगे ले जाने के लिए उनका समर्थन और सलाह देगा." शापूर के बेटे पल्लोन पहले से ही कंपनी का हिस्सा हैं क्योंकि वह करीब पांच साल पहले समूह में शामिल हुए थे और होल्डिंग कंपनी के बोर्ड में हैं.
30 हजार करोड़ की है ऑर्डर बुक
एसपीसीपीएल विविध हितों वाली भारत की सबसे पुरानी इंजीनियरिंग और निर्माण कंपनियों में से एक है. इसके निर्माण कारोबार की ऑर्डर बुक 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की है. 27 बिलियन डॉलर की टाटा संस की हिस्सेदारी सहित कंपनी का स्वामित्व साइरस और शापुर के बीच उनके पिता पल्लोनजी मिस्त्री द्वारा समान रूप से विभाजित किया गया था.
साइरस मिस्त्री की कार दुर्घटना में हुई मौत की जांच कर रही सात सदस्यीय फोरेंसिक टीम ने कार में सीट बेल्ट न पहनने और ओवरस्पीडिंग के अलावा पुल के फॉल्टी डिजाइन को भी इसका जिम्मेदार बताया है. महाराष्ट्र पुलिस और राज्य परिवहन निगम द्वारा कमीशन की गई इस टीम के आकलन से साफ जाहिर होता है कि मिस्त्री की कार का एक्सीडेंट होने से बच जाता, अगर पुल की डिजाइन में किसी तरह का फॉल्ट नहीं होता. साइट से मिले फोटोग्रॉफ्स और वीडियो को देखने के बाद टीम ने कहा कि एक्सीडेंट के वक्त कार में एयरबैग्स ने भी अपना काम किया.
ओवर स्पीडिंग भी एक वजह
टीम ने कहा कि, “हमने निष्कर्ष निकाला है कि एक पुल का फॉल्टी डिजाइन एक बड़ा मुद्दा था जिसके कारण दुर्घटना हुई. पुल की पैरापेट की दीवार शोल्डर लेन में उभरी हुई पाई गई. डिजाइन दोषपूर्ण पाया गया है.” फोरेंसिक टीम जो कि सेव लाइफ फाउंडेशन द्वारा कमीशन की गई थी उसमें क्रैश जांच में सभी अनुभवी पेशेवर शामिल हैं, जिनमें IIT खड़गपुर के दो PHD, मैकेनिकल और सिविल इंजीनियर और एक सदस्य हैं जो सिमुलेशन और मॉडलिंग में माहिर हैं. सूत्र ने कहा, "कार की स्थिति और घातक चोटें स्पष्ट रूप से निष्कर्ष निकालती हैं कि वाहन तेज गति से चल रहा था."
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