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Vodafone Idea में केंद्र सरकार बनेगी सबसे बड़ी शेयरहोल्डर, क्या बदलेगा मैनेजमेंट?
मई में मार्केट रेगुलेटर SEBI ने केंद्र सरकार को Vodafone Idea के शेयरों के अधिग्रहण के लिये शेयरहोल्डर्स के लिए ओपन ऑफर लाने से छूट दी थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: कर्ज में डूबी टेलीकॉम कंपनी Vodafone Idea के लिये राहत की खबर है, मार्केट रेगुलेटर SEBI ने कंपनी के 16,000 करोड़ रुपये के रेगुलेटरी बकाया ब्याज को इक्विटी में बदलने की केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. मीडिया रिपोर्ट्स में एक सरकारी अधिकारी के हवाले से ये खबर बताई गई है.
33% हिस्सेदार केंद्र सरकार के पास
पिछले साल सितंबर में दूरसंचार क्षेत्र के लिए सरकार के सुधारों के हिस्से के रूप में, जनवरी में अपने ब्याज बकाया को सरकारी इक्विटी में बदलने के विकल्प के साथ साथ कंपनी ने अपने स्पेक्ट्रम और एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) को चार साल के लिये स्थगित किया था. SEBI की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार अब वित्तीय निवेशक के रूप में आ जाएगी. इस ब्याज देय राशि को इक्विटी में बदलने पर, सरकार 33% हिस्सेदारी के साथ कैश की कमी से जूझ रही टेलीकॉम ऑपरेटर में अकेली सबसे बड़ी शेयरधारक बन जाएगी. प्रोमोटर की हिस्सेदारी भी कंपनी में 74.99 परसेंट से घटकर 50 परसेंट रह जाएगी.
ब्याज बकाया को इक्विटी में बदला जाएगा
आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने कर्ज से जूझती टेलीकॉम कंपनियों के लिए पिछले साल एक राहत पैकेज का ऐलान किया था, जिसमें स्पेक्ट्रम की किस्त और AGR बकाया को चुकाने के लिये चार सालों का वक्त दिया गया था. सरकार ने ये भी विकल्प दिया था कि इस रकम पर जो भी ब्याज बनेगा वो उसे इक्विटी में बदल सकते हैं.
10 जनवरी 2022 को कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में फैसला हुआ था कि स्पेक्ट्रम और AGR के बकाया पर जो भी ब्याज बनेगा उसे इक्विटी में तब्दील किया जा सकता है. अप्रैल-जनवरी तिमाही में VIL पर 1.99 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था. जिस पर ब्याज 16,000 करोड़ रुपये बनता है.
क्या मैनेजमेंट में बदलाव होगा?
मई में मार्केट रेगुलेटर SEBI ने केंद्र सरकार को Vodafone Idea के शेयरों के अधिग्रहण के लिये शेयरहोल्डर्स के लिए ओपन ऑफर लाने से छूट दी थी. जबकि सेबी के नियमों के मुताबिक- कोई भी कंपनी अगर किसी लिस्टेड कंपनी में 25 परसेंट या इससे ज्यादा का अधिग्रहण करती है तो उसे अनिवार्य रूप से शेयरधारकों के लिए ओपन ऑफर लाना होता है. ये ओपन ऑफर मौजूदा शेयरधारकों के लिये एक मौका भी होता है कि वो कंपनी से निकल जाएं, ये एक तरह से सरकार के कैश-आउटफ्लो के रूप में होता, जिससे टेलीकॉम कंपनी को राहत देने की मंशा को धक्का लगता.
सरकार को ओपन ऑफर से छूट देने के बाद सेबी ने पब्लिक शेयरहोल्डिंग के रूप में सरकार की होल्डिंग के क्लासिफिकेशन को भी मंजूरी दे दी थी. सेबी ने अपने आदेश में कहा था कि भारत सरकार की VIL के बोर्ड या मैनेजमेंट में हिस्सा लेने की कोई इच्छा नहीं है और कंपनी के कंट्रोल में कोई बदलाव भी नहीं होने जा रहा है, इसलिये ऐसी होल्डिंग को पब्लिक शेयरहोल्डिंग के तौर पर क्लासिफाई किया जाता है.
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