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इनकम टैक्‍स विभाग के सवालों से बचना पड़ सकता है भारी, CBDT ने दी नसीहत

CBDT ने कहा है कि अगर किसी भी शख्‍स ने इनकम टैक्‍स के सवालों के जवाबों को नहीं दिया तो उसकी पूरी स्‍क्रूटनी की जाएगी. हालांकि गाइडलाइन में इसमें CBDT ने विस्‍तार से इसकी जानकारी दी है. 

ललित नारायण कांडपाल 2 years ago

कहीं आप भी उन लोगों में शामिल तो नहीं हैं जो इनकम टैक्‍स के सवालों से बचते हुए अपना टैक्‍स फाइल कर देते हैं या बाद में आने वाली इनकम टैक्‍स विभाग के सवालों से बचते हैं. अगर ऐसा है तो आपके लिए इनकम टैक्‍स विभाग ने एक फ्रेश गाइडलाइन जारी की है, जिसमें उसने कहा है कि अगर कोई भी शख्‍स इनकम टैक्‍स विभाग के सवालों से बचेगा तो उसकी पूरी स्‍क्रूटनी की जाएगी. इनकम टैक्‍स विभाग ने सर्च एंड सीजर के मामले को लेकर भी विशेष गाइडलाइन जारी की है. 

क्‍या कहती आयकर विभाग की ये गाइडलाइन 
आयकर विभाग ने हाल ही में ये नई गाईडलाइन जारी की है जिसमें उसने कहा है कि कर चोरी, तलाशी और जब्ती के मामलों में धारा 142 (1) और 148 के तहत जहां सर्वेक्षण किया गया था या जहां आयकर नोटिस दिए गए थे, उसके आधार पर कर रिटर्न की जांच की जाएगी. नोडल कर विभाग ने कहा है कि आयकर विभाग के सवालों से बचने वालों के आयकर रिटर्न (आईटीआर) की पूरी जांच की जाएगी. हाल ही में जारी किए गए दिशा-निर्देशों में आयकर विभाग द्वारा जांच के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं के बारे में भी बताया गया है. 

किन आधारों पर होगी स्‍क्रूटनी 
सीबीडीटी की ओर से साफतौर पर कहा गया है कि वो किन मामलों को लेकर स्‍क्रूटनी करने जैसा कदम उठाएगा. हम आपको उन्‍हीं कुछ कदमों के बारे में बताने जा रहे हैं. 
विशिष्ट कर चोरी: I-T विभाग उन मामलों को उठाएगा जहां कानून एजेंसी द्वारा प्रदान किए गए असेसमेंट वर्ष के लिए कर चोरी की ओर इशारा करते हुए खास जानकारी मुहैया कराई गई हो. असेसमेंट वर्ष के लिए करदाता द्वारा कर रिटर्न दाखिल किया गया हो. 

धारा 148 के तहत:  इनकम टैक्‍स विभाग की गाइडलाइन ये भी कहती है कि अगर नोटिस के जवाब में टैक्स रिटर्न दाखिल किया गया है या नहीं, तो धारा 148 के तहत नोटिस दिए जाने पर भी यह मामले उठाएगा. आपको बता दें कि आयकर अधिनियम की धारा 148 स्पष्ट रूप से कहती है कि यदि किसी व्यक्ति की कर योग्य आय आईटी विभाग से आकलन से बच गई है, तो एक असेसमेंट अधिकारी यह साबित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी करेगा कि वे कर का भुगतान कर रहे हैं. 

वहीं सेक्शन 142(1) के तहत: अगर करदाता सेक्शन 142(1) के तहत नोटिस के जवाब में टैक्स रिटर्न फाइल नहीं करता है तो ऐसे मामले उसकी जांच के दायरे में आएंगे. फाइल किए गए रिटर्न के संबंध में अगर आयकर विभाग अधिक स्‍पष्‍टता चाहता है तो भी वो धारा 142(1) के तहत नोटिस जारी करता है. 
जहां रिटर्न दाखिल किया गया है वहां और अधिक जानकारी के लिए भी आयकर अधिनियम की धारा 142(1) के तहत अधिक स्पष्टीकरण लिया जा सकता है. ये धारा अधिकारियों को ये अधिकार देती है. यदि रिटर्न दाखिल नहीं किया गया है, तो वे निर्धारित तरीके से आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कह सकते हैं.

 तलाशी और ज़ब्ती के मामले: इसके अलावा, अगर आयकर अधिकारियों ने 1 अप्रैल, 2021 से पहले या उसके बाद तलाशी और ज़ब्ती की है, तो स्‍क्रूटनी की जा सकती है.
सर्वे के मामले: अगर आयकर विभाग ने दाखिल किए गए टैक्स रिटर्न के आधार पर धारा 133ए के तहत एक सर्वेक्षण किया है, तो इसकी पूरी जांच की जा सकती है. इसके तहत, कुछ मामलों में अपवाद भी है.  जिन मामलों में वापसी या अनुमोदन के आदेश को पलट दिया गया है या अपीलीय कार्यवाही में अलग कर दिया गया है, उन्हें इससे बाहर रखा जाएगा, ऐसा आयकर विभाग का आदेश कहता है.
 


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