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BWRetailLeadership: कोरोना से कितना बदल गया रिटेल वर्ल्ड, यहां मिला जवाब

BW Businessworld द्वारा आयोजित रिटेल लीडरशिप समिट में सेक्टर से जुड़े दिग्गजों ने बताया कि कोरोना के बाद क्या बदलाव आए हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

'रिटेल लीडरशिप समिट' दिल्ली में शुरू हो चुकी है. BW Businessworld द्वारा आयोजित इस समिट में रिटेल सेक्टर से जुड़े दिग्गज शिरकत कर रहे हैं. समिट की शुरुआत BW Business World के चेयरमैन एवं एडिटर इन चीफ डॉक्टर अनुराग बत्रा के Welcome Address के साथ हुई. इस दौरान, हुए एक पैनल डिस्कशन में कोरोना के बाद रिटेल सेक्टर में आए बदलावों पर चर्चा की गई.

इन्होंने की शिरकत
समिट में 'Shifts towards Physical retailing following the pandemic and core areas of focus for omnichannel retail' विषय पर पैनल डिस्कशन हुआ, जिसमें SignatureGlobal India के MD रवि अग्रवाल, Meena Bazar के मालिक समीर मंगलानी, Libas के फाउंडर सिद्धांत केसवानी, Hindware Home Innovation के CEO राकेश कौल शामिल हुए. इस डिस्कशन की अध्यक्षता BW Businessworld के सीनियर एडिटर रूहेल अमीन ने की. रूहेल ने सबसे पहले पैनलिस्ट से पूछा कि कोरोना से पहले और बाद में रिटेल सेक्टर में किस तरह का बदलाव आया है? 

बदल गई है कंज्यूमर की सोच
इस सवाल के जवाब में SignatureGlobal India के MD रवि अग्रवाल ने कहा कि कोरोना से पहले और बाद में जो सबसे बड़ा बदलाव आया है, वो कंज्यूमर की सोच है. पहले लोग सेविंग पर जोर देते थे, लेकिन अब वह अपनी लाइफ को पूरी तरह एन्जॉय करना चाहते हैं. जहां तक बात बिजनेस की है, तो उसके लिए भी काफी कुछ बदला है. सिग्नेचर ग्लोबल अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए फेमस है. हम रिटेल शॉप जैसे कमर्शियल प्रोजेक्ट पर भी काम करते हैं. अब बाजार कोरोना के प्रभाव से निकल रहा है. 

फन, फूड और फैशन
उन्होंने आगे कहा, 'फन, फूड और फैशन के बिना लाइफ पूरी नहीं हो सकती. और इसके बाद आती है नीड यानी जरूरत. एक रिटेलर के पास समाधान होना चाहिए. कई रिटेलर दिवालिया हो रहे हैं, इसकी वजह है अधिग्रहण की उच्च लागत और बढ़ता रेंट. लेकिन हमारे पास इस समस्या का समाधान भी है. हम सभी सेंगमेंट में काम कर रहे हैं. कंज्यूमर हमेशा हमारे लिए पहली प्राथमिकता है'.

रिटेल डिक्शनरी में जुड़े नए शब्द
Libas के फाउंडर सिद्धांत केसवानी ने कहा कि बीते कुछ सालों में रिटेल डिक्शनरी में कई नए शब्द शामिल हुए हैं, जैसे फिजीटल, ओमनी चैनल आदि. यदि हम कोरोना काल के बाद की बात करें, तो रिटेल सेक्टर में बहुत कुछ बदल गया है. खासकर, लोगों की मानसिकता में बदलाव आया है. कुछ साल पहले तक हम कह सकते थे कि ऑनलाइन कस्टमर, ऑफलाइन कस्टमर की तरह नहीं हैं, लेकिन अब सब बदल गया है. इसी वजह से रिलायंस और टाटा जैसी कंपनियां अब ईको सिस्टम बनाने पर जोर दे रही हैं. अब ग्राहकों को ऑनलाइन और ऑफलाइन के आधार पर अलग नहीं किया जाता. ब्रैंड्स भविष्य में भी ईको-सिस्टम बनाने पर जोर देंगे.

उदाहरण देकर समझाई बात
सिद्धांत केसवानी ने एक उदाहरण के जरिए अपनी बात समझाते हुए कहा, 'मान लीजिए मैं किसी ग्रोसरी स्टोर जाता हूं और कोई नया ब्रैंड खरीदता हूं. अगले कुछ दिनों में जब मुझे फिर उसकी जरूरत पड़ती है, तो मैं किसी कारणवश स्टोर नहीं जा पाता. ऐसे में यदि ब्रैंड अलग-अलग ईको सिस्टम जैसे कि ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म, बिग बास्केट आदि पर उपलब्ध नहीं है, तो शायद मैं ब्रैंड बदल लूं. इस तरह, जिस नए ब्रैंड को मैंने चुना था, उसका एक कस्टमर कम हो जाएगा. कोरोना के दौर में ग्राहकों को घर बैठे-बैठे समय पर सामान की डिलीवरी की आदत हो गई थी, जो अभी भी जारी है. लिहाजा, कंपनियों को इसके अनुसार काम करना होगा. उन्हें एक ईको-सिस्टम विकसित करना होगा'.   

डिजिटल की भूमिका महत्वपूर्ण
Hindware Home Innovation के सीईओ राकेश कौल ने कहा कि कोरोना की वजह से काफी कुछ बदला है. कोरोना ने कंपनियों को डिजिटल होने पर मजबूर किया है, लेकिन हमारे लिए यह कोई नई बात नहीं थी. हमने भविष्य को ध्यान में रखते हुए 2016 से ही इस दिशा में काम शुरू कर दिया था. Hindware Home Innovation एक ट्रेडिशनल बाथरूम कंपनी है, जिसने डिजिटल फर्स्ट पर जोर दिया है. 'डिजिटल फर्स्ट' को जल्दी अपनाने का फायदा हमें कोरोना काल में भी मिला. दूसरे शब्दों में कहूं तो कोरोना में हम एडवांटेज में थे, क्योंकि हमने ऑनलाइन या डिजिटल मोड को पहले अपना लिया था. डिजिटल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यही टेकओवर करेगा. 

टेक्नोलॉजी को इग्नोर नहीं कर सकते
उन्होंने आगे कहा कि फिजिकल में स्पेस आदि की समस्या होती है, जबकि डिजिटल में ऐसा कुछ नहीं है. हम अपने उत्पादों के बारे में छोटी से छोटी जानकारी डिजिटल मोड पर डाल सकते हैं, ताकि ग्राहक को अपना पसंदीदा उत्पाद चुनने में आसानी हो. आजकल फिजीटल स्पेस और ओमनी चैनल महत्वपूर्ण हैं. टेक्नोलॉजी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कंपनियों को फुटप्रिंट को मापना होगा और उसी अनुसार अपनी रणनीति तैयार करनी होगी. कोरोना के बाद मिली अच्छी ग्रोथ
समीर मंगलानी ने बताया कि कोरोना के बाद उनकी कंपनी Meena Bazar ने काफी अच्छी ग्रोथ हासिल की है. उन्होंने कहा, 'कोरोना महामारी के बाद हम विस्तार कर रहे हैं, हम हर महीने 3 स्टोर खोलने के लिए प्रतिबद्ध हैं. छोटे शहरों पर भी हम फोकस कर रहे हैं. स्थिति सामान्य होने के बाद अब लोग अपने स्थानीय बाजार और दुकानों पर जाकर खरीदारी करना चाहते हैं. कोरोना ने काफी कुछ बदला है, लेकिन हमारे लिए स्थिति पहले जैसी होती नजर आ रही है. बाजार में भीड़ बढ़ने का मतलब है दुकानदारों को फायदा मिलना. 

अगले साल क्या हो रणनीति?
अगले साल यानी 2023 में कंपनियों और ब्रैंड को किस रणनीति पर काम करना चाहिए? इस पर SignatureGlobal India के MD रवि अग्रवाल ने कहा, 'पोस्ट पेंडमिक में नया ट्रेंड डेवलप हुआ है. ग्राहकों के सपने पूरे हैं. आने वाले साल में जो उनके लिए समाधान लेकर आएगा, वही विनर होगा, क्योंकि उनके पास फंड सीमित है'. Meena Bazar के मालिक समीर मंगलानी के मुताबिक, कंपनियों को पर्सनलाइजेशन पर जोर देना होगा. सिद्धांत केसवानी का मानना है कि कंपनियों को सुविधाजनक ईको सिस्टम विकसित करना चाहिए.


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