होम / बिजनेस / इन्वेस्टर्स को आकर्षित नहीं कर पा रहे CM शिंदे? डेढ़ महीने में 2 बड़े प्रोजेक्ट हाथ से निकले
इन्वेस्टर्स को आकर्षित नहीं कर पा रहे CM शिंदे? डेढ़ महीने में 2 बड़े प्रोजेक्ट हाथ से निकले
महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार एक बार फिर से विपक्ष के निशाने पर है, क्योंकि एक और बड़ा प्रोजेक्ट राज्य के हाथ से निकल गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार इन्वेस्टर्स को आकर्षित नहीं कर पा रही है. बीते कुछ वक्त में जिस तरह से प्रोजेक्ट्स उसके हाथ से निकले उसे देखकर तो कम से कम यह कहा ही जा सकता है. पिछले डेढ़ महीने में ही सरकार को दो बड़े झटके लगे हैं. पहले 1.5 लाख करोड़ रुपए का वेदांत-फॉक्सकॉन (Vedanta Foxconn) प्रोजेक्ट महाराष्ट्र के बजाए गुजरात पहुंच गया और अब 22,000 करोड़ रुपए का टाटा-एयरबस प्रोजेक्ट (Tata-Airbus Project) भी महाराष्ट्र के हाथ से निकल गया है.
क्या है टाटा-एयरबस प्रोजेक्ट?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को गुजरात के वडोदरा में टाटा-एयरबस के प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी. इस प्रोजेक्ट के तहत सी-295 एयरक्राफ्ट बनाए जाएंगे. इंडियन एयरफोर्स ने इसके लिए 2021 में 21,935 करोड़ रुपए की डील की थी. टाटा की अगुवाई वाला एक कंसोर्टियम वडोदरा में प्लांट लगाकर एयरफोर्स को 56 ऐसे एयरक्राफ्ट प्रदान करेगा. ये विमान पुराने पड़ चुके एवरो विमानों का स्थान लेंगे.
देश में पहली बार होगा ये काम
यह प्रोजेक्ट घरेलू एयरोस्पेस क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इस परियोजना के तहत पहली बार कोई प्राइवेट कंपनी देश में मिलिट्री एयरक्राफ्ट तैयार करेगी. कल-पुर्जों से लेकर फाइनल एसेम्बली तक विमान का संपूर्ण निर्माण देश में ही होगा. सी-295 एयरक्राफ्ट सैन्य और राहत कामों के लिए भरोसेमंद विमान है. यह एक बार में 71 सैनिकों या फिर उपकरणों के साथ 50 पैराट्रूपर्स को ले जाने में सक्षम है. इसकी मदद से दुर्गम इलाकों में भी रसद पहुंचाई जा सकती है.
महाराष्ट्र को हुआ ये घाटा
लगातार दो बड़े प्रोजेक्ट्स का हाथ से निकलना महाराष्ट्र सरकार की नीतियों पर कोशिशों पर सवाल खड़े करता है. टाटा का प्रोजेक्ट यदि राज्य में आता तो उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होते. एक अनुमान के मुताबिक, टाटा-एयरबस प्रोजेक्ट से 15,000 से अधिक कुशल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होंगे. विपक्ष एक बार फिर से सरकार पर हमलावर हो गया है. उसका कहना है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को राज्य की नहीं, केवल अपनी चिंता है.
पहले शिंदे के मंत्री ने किया था दावा
महाराष्ट्र के इंडस्ट्रीज मिनिस्टर उदय सामंत ने 15 सितंबर को दावा किया था कि भले ही वेदांत प्रोजेक्ट राज्य के हाथ से निकल गया, लेकिन टाटा-एयरबस प्रोजेक्ट नागपुर के आसपास स्थापित किया जाएगा, लेकिन अब उनका कहना है कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है. मीडिया रिपोर्ट में महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि तीन साल पहले टाटा के अधिकारियों ने नागपुर में इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन की जानकारी मांगी थी. वहीं, विपक्ष का कहना है कि ये प्रोजेक्ट महाराष्ट्र में आना था, लेकिन सरकार की नाकामी के चलते गुजरात चला गया.
टैग्स