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किसी भी देश के लिए जरूरी है R&D सेक्टर में बेहतरीन निवेश : CEO BLUE STAR
हमें अपनी निर्माण क्षमता को बढ़ाने की जरूरत है, जिससे हम दुनिया में और एक बेहतर स्थिति में आ सकें. हाल ही में लाई गई पीएलआई स्कीम ने बड़ी भूमिका अदा की है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
राजधानी दिल्ली में BW Retail Summit में बोलते हुए ब्लू स्टार के सीईओ बी थियागराजन ने कहा कि किसी भी देश की ग्रोथ के लिए R&D सेक्टर में इन्वेस्टमेंट होना बेहद जरूरी है. दुनिया में जिन देशों ने भी ग्रोथ किया है उनके R&D सेक्टर में जबरदस्त ग्रोथ हुई है, जिसके कारण वह अपनी खपत, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल सेक्टर को बढ़ाने में कामयाब रहे हैं. जबकि भारत में इसकी ग्रोथ बेहद कम है.
R&D सेक्टर में ग्रोथ बहुत जरूरी
उन्होंने कहा कि दुनिया में जिन देशों ने भी ग्रोथ की है उनके R&D सेक्टर की ग्रोथ लगातार बढ़ती रही है. अब वह भले ही चीन हो जापान हो या दूसरे देशों में R&D सेक्टर की ग्रोथ में लगातार इजाफा हुआ है. लेकिन अगर आप भारत के R&D सेक्टर की ग्रोथ को बात करें तो वह भारत की जीडीपी का .65% है और हमें इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. क्योंकि देश की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ, रिटेल ग्रोथ और खपत इसी आरएंडी पर डिपेंड करती है
आज ग्रोथ के लिए मोजूद है कई साधन
बी थियागराजन ने कहा कि आज इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने के लिए कई तरह के विकल्प मौजूद है, जिसमें पीएलआई स्कीम भी मौजूद है. इस स्कीम को मैं जानता हूं जो कि एयर कंडीशनर इंडस्ट्री सहित कई अन्य क्षेत्रों में लाई गई है. सीआईआई के साथ कंसल्टेशन करके इस स्कीम को लाया गया है. अगले साल तक कई इंडस्ट्री की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी डबल होने जा रही है. बहुत से इंडस्ट्रीज पर काम कर रही है, जिसमें ब्लू स्टार भी शामिल है.
चाइना ने कैसे बढ़ाया अपना प्रोडक्शन
चाइना ने अपने प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए ये काम किया कि उसने अपनी कंजप्शन साइकिल को बढ़ा दिया, जिसके कारण आज चाइना में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर बहुत तेजी से ग्रो कर रहा है. मुझे लगता है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को ग्रो करने के लिए हमें भी अलग-अलग तरीके से काम करने की जरूरत है जो हमारी परिस्थितियों के अनुसार सही बैठते हों
चाइना प्लस वन कौन है
उन्होंने कहा कि मैं पिछले कुछ समय से एक टर्म सुन रहा हूं जो है चाइना प्लस वन. इस पर लोग चर्चा कर रहे है. लोग ये सोच रहे हैं कि आखिर चाइना प्लस वन कहां से आया है. क्या ऐसे ही किसी तरह से युवाओं ने डिक्लेअर किया है या फिर यह हमारे अपने दिमाग की ही उपज है. कई लोग इसमें चाइना प्लस 3 भी कह रहे हैं जबकि कई लोगों का यह मानना है कि चाइना प्लस वन का मतलब है कि चाइना प्लस इंडिया जो कि सच नहीं है. अगर हम एयर कंडीशन की बात करें तो भारत की बाजार की क्षमता 7 मिलियन यूनिट की है, जबकि चाइना का डोमेस्टिक कंजप्शन 80 मिलियन यूनिट है. चाइना की एक्सपोर्ट क्षमता 110 यूनिट की है, अगर हम यह कह रहे हैं कि हम चाइना प्लस वन है तो हम एक ऐसे देश से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं इसकी कंजक्शन क्षमता 110 यूनिट की है. इसलिए मैं मानता हूं कि किसी भी देश की ग्रोथ के लिए इनोवेशन बहुत जरूरी है. जबकि रिटेल में एफडीआई की जरूरत अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है.
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