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FD की ब्याज दरों में बढ़ोतरी से बैंकों का घटा मुनाफा, तिमाही नतीजों में दिखेगा असर
इससे आने वाले तिमाही नतीजों में मार्जिन काफी कम हो जाएगा. अधिकांश बैंकों ने सितंबर तिमाही में बेहतर लाभ संख्या और मजबूत मार्जिन की सूचना दी थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः देश के सभी बैंकों ने अपने फिक्सड डिपॉजिट की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है. इसका फायदा ग्राहकों को तो मिल रहा है, लेकिन इससे बैंकों के प्रॉफिट मार्जिन पर असर देखने को मिल रहा है. इससे आने वाले तिमाही नतीजों में मार्जिन काफी कम हो जाएगा. अधिकांश बैंकों ने सितंबर तिमाही में बेहतर लाभ संख्या और मजबूत मार्जिन की सूचना दी, जो कि फ्रंट-लोडेड लोन दरों में वृद्धि और विलंबित जमा दर में वृद्धि के संयोजन से उनको सहायता प्राप्त हुई है.
बैंक नहीं बढ़ा रहे थे दर, ग्राहकों की वजह से लिया फैसला
बैंकिंग एक्सपर्ट के मुताबिक ज्यादातर सरकारी और निजी बैंक एफडी पर मिलने वाली ब्याज दर को बढ़ाने के अनिच्छुक थे, लेकिन ग्राहकों के एफडी से कम ब्याज दर मिलने के बाद वापस चले जाने से उनको ये कदम उठाना पड़ा. अधिकांश ग्राहकों ने एफडी के बजाय ऐसे विकल्पों में निवेश करना शुरू कर दिया, जिसमें उनको ज्यादा अच्छा रिटर्न मिल रहा था.
सेविंग्स में भी नहीं कर रहे थे जमा
ग्राहक भी सेविंग्स अकाउंट में ब्याज कम मिलने की वजह से अपने जमा पैसे को निकाल रहे थे, या फिर नया इंवेस्टमेंट नहीं कर रहे थे, जिससे बैंकों की आय पर असर पड़ रहा था. हाल के सप्ताह में बैंकों ने सीमित अवधि के लिए उच्च ब्याज दरों और नई जमाराशियों पर नियमित दर वृद्धि के माध्यम से खोई हुई जमाराशियों को वापस पाने की कोशिश की है. उदाहरण के लिए, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने हाल ही में जमा दरों में 80 आधार अंकों (बीपीएस) तक की वृद्धि की है. भारत के सबसे बड़े बैंक ने 211 दिनों से लेकर एक साल से कम समय के लिए अपने फंड को पार्क करने के इच्छुक नए जमाकर्ताओं को 80 बीपीएस की बढ़ोतरी की पेशकश की है.
अन्य बैंकों ने भी बढ़ा दी ब्याज दरें
एचडीएफसी बैंक ने बुधवार को सावधि जमा पर ब्याज दरें बढ़ाईं, जो इस महीने इस तरह की दूसरी बढ़ोतरी है. केनरा बैंक, यस बैंक और आईडीबीआई बैंक जैसे अन्य ने भी जमा पर विशेष त्योहारी सीजन की पेशकश की है, जो धन के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा की ओर इशारा करते हैं.
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के वित्तीय संस्थानों के निदेशक और प्रमुख प्रकाश अग्रवाल ने कहा, "मेरा मानना है कि अगले छह महीनों में जमा दरों में तेजी से वृद्धि होगी, और इसका बैंकों पर अधिक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि क्रेडिट लागत में कमी आई है." अग्रवाल के अनुसार, अगले 12 महीनों में शुद्ध ब्याज मार्जिन में कमी हो सकती है क्योंकि जमा आधार का पुनर्मूल्यांकन होता है.
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