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बैंकों में 5-डेज वर्किंग को लेकर आया ये बड़ा अपडेट, आपका जानना है ज़रूरी
बैंक कर्मचारी 5 दिन का कार्य दिवस लागू करने की मांग कर रहे हैं. पिछले साल LIC में इस व्यवस्था को लागू किया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
बैंक कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर कई बार हड़ताल पर जा चुके हैं, लेकिन उसका उन्हें कोई खास फायदा नहीं हुआ है. बैंकों कर्मचारियों की दो मांग सबसे प्रमुख हैं - सैलरी हाइक और 5-डेज वर्किंग. उनका कहना है कि बीते कुछ समय में काम का बोझ काफी बढ़ गया है. जब LIC सहित कई कंपनियां हफ्ते में 5 दिन कामकाज की पॉलिसी अपना रही हैं, तो बैंकों में भी इसे अमल में लाया जा सकता है. हालांकि, मोदी सरकार इसके लिए तैयार नज़र नहीं आती. अब बैंक यूनियन्स ने 5-डेज वर्किंग के संबंध में एक नया प्रस्ताव रखा है.
AIBEA ने लिखा IBA को लेटर
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक यूनियनों ने सरकार के सामने काम के घंटे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) को लिखे पत्र में ऑल इंडिया बैंक एंप्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA) ने इस प्रस्ताव के संबंध में बताते हुए कहा है कि रोजाना काम के घंटे को आधा घंटा बढ़ाकर हफ्ते में 5 दिन काम की पॉलिसी लागू की जा सकती है. उसका कहना है कि बैंकों के कामकाज का समय आधा घंटा पहले शुरू किया जा सकता है, इससे हफ्ते में 5 दिन की नीति से कोई नुकसान नहीं होगा.
ऐसी हो सकती है व्यवस्था
यूनियन का कहना है कि बैंकों में काम का प्रस्तावित समय सुबह 9.15 बजे से शाम 4.45 बजे तक रखा जाए, जो अभी तक सुबह 9:45 बजे से शाम 4:45 बजे है. लेटर में यह भी कहा गया है कि बैंकों में कैश ट्रांजैक्शन से जुड़े कार्यों को सुबह 9.30 बजे से दोपहर 1.30 बजे और गैर-कैश ट्रांजैक्शन से जुड़े कामकाज को दोपहर 2 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक किया जाए. रिपोर्ट में AIBEA के जनरल सेक्रेटरी, सीएच वेंकटाचलम के हवाले से कहा गया है कि हम बैंकों में 5 दिन का कार्य दिवस लागू करने की मांग कर रहे हैं. पिछले साल LIC में इसे लागू किया गया है. इसलिए हमने फिर से यह मांग दोहराई है.
सरकार से जताई ये उम्मीद
सीएच वेंकटाचलम के अनुसार, IBA इस मामले में हमारा रुख जानना चाहता है कि हम 2 शनिवार को छुट्टी रहने से हुए काम के नुकसान की भरपाई कैसे करेंगे. अब हम इस बात पर सहमत हुए हैं कि रोजाना काम के घंटे को आधा घंटा बढ़ाया जा सकता है. हमें उम्मीद है कि आईबीए के साथ-साथ, सरकार और आरबीआई भी इससे सहमत होंगे. गौरतलब है कि बैंक यूनियन्स सरकार के प्राइवेटाइजेशन का भी विरोध कर रही हैं. उन्होंने IDBI बैंक को लेकर सरकार के कदम पर एतराज जताया है.
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