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Archean Chemical IPO का ग्रे मार्केट में धमाल, जानिए क्या चल रहा लेटेस्ट भाव
Archean Chemical IPO के संबंध में ग्रे मार्केट सेंटिमेंट में वृद्धि का क्रेडिट दलाल स्ट्रीट सेंटिमेंट में बदलाव और बोली लगाने वालों की मजबूत प्रतिक्रिया को दिया जा सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: Archean Chemical IPO को लेकर निवेशकों के बीच जबर्दस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. इस कंपनी के IPO के लिए अप्लाई करने की तारीख 9 नवंबर से 11 नवंबर, 2022 तक थी. अब निवेशकों को इस कंपनी के IPO के अलॉटमेंट की तारीख का बेसब्री से इंतजार है. ऐसी उम्मीद है कि 16 नवंबर, 2022 को अलॉटमेंट हो सकता है.
32.23 गुना ज्यादा सब्सक्राइब हुआ IPO
आपको बता दें कि Archean Chemical का IPO 32.23 गुना ज्यादा सब्सक्राइब हुआ है, जबकि इसका रिटेल हिस्सा 9.96 गुना ज्यादा सब्सक्राइब हुआ है. Archean Chemical IPO का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) भी बहुत अच्छा संकेत दे रहा है. मार्केट ऑब्जर्वर के अनुसार, आज यानी सोमवार (14 नवंबर, 2022) को इसका GMP 100 रुपया है, जो एक दिन पहले के भाव से 15 रुपये ज्यादा है.
Archean Chemical IPO पर ग्रे मार्केट बुलिश
ऑब्जर्वर ने कहा कि Archean Chemical IPO के संबंध में ग्रे मार्केट सेंटिमेंट में वृद्धि का क्रेडिट दलाल स्ट्रीट सेंटिमेंट में बदलाव और बोली लगाने वालों की मजबूत प्रतिक्रिया को दिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि निवेशकों की मजबूत प्रतिक्रिया के बाद ग्रे मार्केट पहले से ही Archean Chemical IPO पर बुलिश है. अब दलाल स्ट्रीट पर सकारात्मक रुख ने सोने पर सुहागा कर दिया है. उन्हें ग्रे मार्केट सेंटिमेंट में और वृद्धि की उम्मीद थी क्योंकि शेयर आवंटन की तारीख तेजी से पास आ रही है और मजबूत वैश्विक संकेतों पर बाजार में और उछाल आने की उम्मीद है.
क्या होता है IPO ग्रे-मार्केट
शेयर बाजार में जो ट्रेडिंग होती है उसकी निगरानी मार्केट रेगुलेटर सेबी करता है, इसे White Market कहते हैं, क्योंकि ये कानून के दायरे में होता है. दूसरी तरफ कुछ बिजनेस काले धंधे या Black Market होते हैं, जो कानून की नजर में गलत होते हैं, जैसे कोई चीज स्मगलिंग या चोरी करके बेची जाए, लेकिन इन सबके बीच में एक ग्रे एरिया होता है, जो न तो White Market के दायरे में आता है और न Black Market के दायरे में. यानी न तो वो कानूनी है और न ही गैर-कानूनी. बस वो रेगुलेटेड नहीं है. ठीक ऐसे ही होते हैं IPO ग्रे मार्केट, जिसमें शेयरों की ट्रेडिंग तो होती है, लेकिन उन पर सेबी के नियम लागू नहीं होते. सेबी के नियम लिस्टेड कंपनियों पर ही लागू होते हैं, लेकिन अगर कोई IPO लिस्ट ही नहीं हुआ तो उस पर सेबी के नियम लागू नहीं हो सकते.
ग्रे-मार्केट निवेशकों के लिए कैसे मददगार है?
ग्रे मार्केट और कुछ नहीं बल्कि एक संकेत होता है कि कोई शेयर लिस्ट होने के बाद कैसा परफॉर्म करेगा. यदि कोई शेयर ग्रे-मार्केट में IPO Price ने नीचे ट्रेड कर रहा होता है तो उसकी परफॉर्मेंस अच्छी नहीं मानी जाती है और जो IPO Price से ऊपर ट्रेड कर रहा होता है, उसके प्रति रिटेल इन्वेस्टर्स अट्रैक्ट होते हैं. भले ही ग्रे-मार्केट आधिकारिक नहीं है, लेकिन गैर-कानूनी भी नहीं है.
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