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केवल UK ही नहीं, इन देशों के साथ भी संतुलित FTA चाहता है भारत, जानें क्या है तैयारी
सरकार का कहना है कि फ्री ट्रेड अग्रीमेंट यानी FTA से देश के निर्यात समुदाय को मार्केट में बेहतर विकल्प मिल पाएंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) को अंतिम रूप देने के लिए छठे दौर की बातचीत हाल ही में हुई थी. अब सातवें दौर की बातचीत अगले साल की शुरुआत में ब्रिटेन में हो सकती है. दोनों देशों के बीच काफी समय से FTA को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन ब्रिटेन के राजनीतिक हालातों के चलते कोई फैसला नहीं हो पाया था. अब उम्मीद है कि जल्द ही इस दिशा में कोई सहमति बन जाए. वैसे, भारत ब्रिटेन के साथ-साथ यूरोपीय संघ, कनाडा, इजराइल, और खाड़ी देशों के साथ भी एक संतुलित मुक्त व्यापार संधि (FTA) को अंतिम रूप दे रहा है.
मिल सकेंगे बेहतर विकल्प
हाल ही में इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट्स प्रमोशन काउंसिल यानी EEPC के 37वें वेस्टर्न रीजन अवॉर्ड प्रिजेंटेशन को संबोधित करते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इस बारे में जानकारी दी थी. बता दें कि EEPC वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा वर्ष 1955 में व्यापार और निवेश को प्रेरित करने के लिए स्थापित की गई संस्था है. FTA के फायदों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया था कि इससे भारत के निर्यात समुदाय को मार्केट में बेहतर विकल्प मिल पाएंगे.
इनके साथ हुए एग्रीमेंट
उन्होंने सरकार की योजना पर प्रकाश डालते हुए कहा था कि हमने अपने बहुत से महत्वपूर्ण व्यापार साझीदारों के साथ मुक्त व्यापार संधि (FTA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. हमने मॉरिशस के साथ व्यापक आर्थिक सहयोग और साझीदारी समझौता (CECPA), संयुक्त अरब अमीरात के साथ व्यापक आर्थिक साझीदारी समझौता (CEPA) और ऑस्ट्रेलिया के साथ आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) पर हस्ताक्षर किए हैं. ये सब समझौते हमारे निर्यात समुदाय को मार्किट में बेहतर विकल्प उपलब्ध करवाने के लिए किए गए हैं.
स्टील उद्योग को फायदा
कुछ समय पहले सरकार द्वारा स्टील के विशिष्ट सामानों से निर्यात शुल्क हटाने के फैसले के बारे में बात करते हुए पटेल ने कहा कि इस फैसले से घरेलू स्टील उद्योग को फायदा होगा और निर्यात भी बढ़ेगा. इस मौके पर EEPC इंडिया के चेयरमैन अरुण कुमार गरोडिया ने भी महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध से जन्मे भू-राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्यों के बावजूद इस वित्तीय वर्ष के दूसरे हाफ में वैश्विक व्यापार धीरे-धीरे ठीक हो सकता है. हालांकि, कोरोना महामारी से पैदा हुई अनिश्चितताएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. तेल के दामों में अभी भी कोई कमी नहीं हुई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में भू-राजनीतिक मुद्दों कि वजह से खतरा बना हुआ है.
सरकार को दिए सुझाव
अरुण कुमार गरोडिया ने बताया कि एक्सपोर्टिंग कम्युनिटी फिलहाल कुछ घरेलु समस्याओं से जूझ रही है, जो आने वाले समय में निर्यातों की बढ़त को नुक्सान पहुंचा सकता है. आने वाले सालों में इंजीनियरिंग निर्यातों की बढ़त को सुनिश्चित करने के लिए, हमने सरकार को कुछ सुझाव भेजे हैं. उन्होंने आगे कहा कि इंजीनियरिंग क्षेत्र की वृद्धि से भारत G-20 के टॉप 3 GDP (सकल घरेलू उत्पाद) वाले देशों में शामिल हो जाएगा.
क्या होता है मुक्त व्यापार समझौता?
मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दो या दो से अधिक देशों के बीच आयात-निर्यात शुल्क (Import-Export Tariffs) को कम करने या समाप्त करने के लिए किया जाने वाला एक समझौता है. FTA के तहत, संबंधित देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार बेहद कम या बिना किसी टैरिफ बाधाओं के किया जा सकता है. दूसरे शब्दों में कहें तो यह व्यापार को उदार बनाता है. एफटीए तरजीही व्यापार समझौतों से अलग हैं, जो केवल एक निश्चित संख्या में टैरिफ को कम करते हैं.
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