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क्या नोटबंदी अपने मकसद में कामयाब हो पाई? आज पूरे हो गए 6 साल!

क्या नोटबंदी से काले धन पर लगाम लगी है, इसे लेकर कुछ भी पुख्ता नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि रियल एस्टेट में आज भी काले धन का हेर फेर होता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: आज नोटबंदी के पूरे 6 साल हो चुके हैं. 7 नवंबर, 2016 का वो दिन रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीवी पर आकर 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने का ऐलान किया था, दावा था कि इससे काले धन और आतंकवाद पर लगाम लगेगी, इस पर लगाम लगी या नहीं, ये अलग चर्चा का विषय है. लेकिन इसके इतर ये दावा भी किया गया कि देश डिजिटल इकोनॉमी की ओर बढ़ेगा, देश में कैश का चलन कम होगा. लेकिन नोटबंदी के 6 साल बाद क्या ऐसा हुआ है? क्या नोटबंदी अपने मकसद में कामयाब हुई है. 

6 साल बाद भी कैश का इस्तेमाल बढ़ा
21 अक्टूबर तक के आंकड़े बताते हैं कि देश में 30.88 लाख करोड़ रुपये की करेंसी पब्लिक के पास थी. इसका क्या मतलब है आपको आगे समझ आएगा, फिलहाल के इतना समझ लीजिए कि ये एक नई ऊंचाई है. इतना पैसा कभी भी पब्लिक के पास नहीं रहा. 30.88 लाख करोड़ की रकम 4 नवंबर, 2016 की रकम से 71.84 परसेंट ज्यादा है, जो कि पब्लिक के पास थी. इसके बाद 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने का ऐलान कर दिया. इस कदम की एक वर्ग ने सराहना की तो किसी अन्य वर्ग ने आलोचना भी की, लेकिन सराहना और आलोचनाओं के बीच में जो आंकड़े हैं, वो मिले जुले हैं. 

डिजिटल लेन-देन में भी तेजी से इजाफा
इसमें कोई शक नहीं है कि देश में बीते कुछ सालों में डिजिटल लेन देन में काफी तरक्की की है, नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के मुताबिक 25 करोड़ भारतीय लेनदेन करने के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करते हैं. अगस्त 2022 में UPI लेनदेन का मूल्य 10.73 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. अब तक UPI को विदेशों में भी इस्तेमाल किया जाने लगा है. इन सबके बावजूद ये भी सच है कि कैश लेनदेन उम्मीद से ज्यादा बढ़ा है, कम होने की बात ही छोड़ दीजिए. RBI की रिपोर्ट में ये कहा गया था कि डिजिटल भुगतान में इजाफा होने के बावजूद समाज का एक बड़ा वर्ग अब भी नकदी का इस्तेमाल कर रहा है. 

इकोनॉमी में कैश का इस्तेमाल बढ़ा
शुक्रवार को RBI के मनी सप्लाई के आंकड़ों पर नजर डालें तो 21 अक्टूबर तक पब्लिक के पास करेंसी बढ़कर 30.88 लाख करोड़ रुपये रही है, जबकि 4 नवंबर, 2016 को सर्कुलेशन में कुल करेंसी ही 17.7 लाख करोड़ रुपये थी. पब्लिक के पास करेंसी में सिक्के और नोट शामिल होते हैं जिनका इस्तेमाल लेन देन, ट्रेड सेटल करने और चीजों और सेवाओं को खरीदने में किया जाता है. जब हम कुल करेंसी सर्कुलेशन में से बैंक के पास जमा कैश को घटा देते हैं तो पब्लिक के पास करेंसी का आंकड़ा मिलता है. इसका मतलब ये हुआ कि इकोनॉमी में कैश का इस्तेमाल निरंतर बढ़ा है, बावजूद इसके कि लोगों के पास डिजिटल लेन देन के ढेरों विकल्प मौजूद हैं.  

काले धन पर लगाम नहीं लगी!
अब बात आती है कि क्या नोटबंदी से काले धन पर लगाम लगी है, इसे लेकर कुछ भी पुख्ता नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं जहां ये पता चला है कि रियल एस्टेट में आज भी काले धन का हेर फेर होता है. नवंबर 2021 के LocalCircles के एक सर्वे के मुताबिक बीते 7 सालों के दौरान 342 जिलों में 32,000 लोगों में से 44 परसेंट ने ये माना है कि उन्होंने प्रॉपर्टी खरीदने के लिए कैश का इस्तेमाल किया, हालांकि स्थिति पिछले साल से थोड़ी बेहतर दिखती है, जब 70 परसेंट लोगों ने माना था कि वो कैश के जरिए प्रॉपर्टी में निवेश करते हैं. प्रॉपर्टी खरीदने में कैश का इस्तेमाल ये बताता है कि इसमें टैक्स बचाने की कोशिश की गई है, तो जाहिर है रिश्वत भी बढ़ी होगी. 

रोजमर्रा के काम में कैश का इस्तेमाल
रियल एस्टेट के अलावा दूसरे कई और भी क्षेत्र हैं कैश का इस्तेमाल बढ़ा है. घर की मरम्मत, घरेलू कर्मचारियों के वेतन, ब्यूटी सर्विसेज में ऐसा हुआ है. सर्वे में शामिल 76% परिवारों ने ये बताया कि उन्होंने पिछले 12 महीनों में किराने का सामान, बाहर खाने और फूड डिलिवरी के लिए कैश का इस्तेमाल किया है. इस सर्वे से ये भी पता चला है कि कई लोगों को अब भी डिजिटल पेमेंट सिस्टम अपनाना बाकी है. शायद इसलिए कि किसी स्टोर से फल, सब्जियां या किराने की कुछ वस्तुओं की खरीद के लिए कैश में पेमेंट करना ज्यादा आसान है.

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